
नेपाल की राजनीति में हलचल के बीच गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने महज 26 दिनों के कार्यकाल के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को उन्होंने बढ़ते विवादों और आरोपों के बीच यह कदम उठाया।
गुरुंग पर कारोबारी दीपक भट्टा के साथ कथित साझेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश को लेकर सवाल उठे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले गुरुंग खुद इन आरोपों के चलते आलोचनाओं के घेरे में आ गए, जिसके बाद उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे
गृह मंत्री पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दावा था कि उनका संबंध कुछ विवादित कारोबारियों से रहा है। नेपाली मीडिया में भी इस संबंध में कई दस्तावेजों का हवाला दिया गया, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।
इस्तीफे पर क्या बोले गुरुंग
इस्तीफा देते हुए गुरुंग ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है, लेकिन जनता की चिंताओं और सवालों को गंभीरता से लेते हुए पद छोड़ना उचित समझा। उन्होंने कहा कि नैतिकता किसी भी पद से बड़ी होती है और जनता का विश्वास सर्वोपरि है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है, और ऐसे में सार्वजनिक जीवन में स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई
इससे पहले 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को भी अनुशासनात्मक आरोपों के चलते पद से हटा दिया था। उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर परिवार को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे।