
रामपुर से शारिक खान की रिपोर्ट
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विकास भवन में प्रेस वार्ता आयोजित
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी और निर्णय क्षमता
महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम
विकसित भारत के लक्ष्य की ओर मील का पत्थर है नारी शक्ति वंदन अधिनियम
नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करेगा नया कानून
प्रेस वार्ता में अधिकारियों व समाजसेवी महिलाओं ने रखे विचार
जनपद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संबंध में विकास भवन सभागार में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मा0 विधायिका मिलक-शाहबाद श्रीमती राजबाला, मुख्य विकास अधिकारी श्री गुलाब चन्द्र, मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 दीपा सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी सुश्री कल्पना देवी, जिला विद्यालय निरीक्षक श्रीमती अंजलि अग्रवाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती ईरा आर्या, वन स्टॉप सेंटर की संचालिका श्रीमती चांद बी सहित समाजसेवी महिलाएं उपस्थित रहीं।
प्रेस वार्ता में मा0 विधायिका ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम है। इस अधिनियम के माध्यम से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं एवं दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी, संतुलित एवं प्रतिनिधिक बनेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव पूजनीय एवं शक्तिस्वरूपा माना गया है। प्राचीन काल से ही महिलाओं ने समाज, राजनीति एवं दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। वर्तमान सरकार द्वारा पारित यह 106वां संवैधानिक संशोधन महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मा0 विधायिका ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समानता अत्यंत आवश्यक है। यदि महिलाओं की भागीदारी कम होगी तो लोकतंत्र पूर्ण रूप से सशक्त नहीं हो सकता। इस अधिनियम के लागू होने से नीति निर्धारण के उच्चतम स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के राजनीति में आने से समाज में संवेदनशीलता, धैर्य एवं करुणा जैसे मूल्यों का समावेश होगा। महिला जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझकर उनके समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे महिला सुरक्षा, संपत्ति अधिकार, कार्यस्थल पर सुरक्षा तथा महिला उद्यमिता जैसे विषयों पर प्रभावी नीतियां बन सकेंगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि इस अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिलाओं के लिए भी उप-आरक्षण का प्रावधान किया गया है। साथ ही आरक्षित सीटों का निर्धारण परिसीमन के उपरांत किया जाएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को समान अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला अधिकारियों एवं समाजसेवी महिलाओं द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए गए तथा अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डाला गया I