
कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज, 2 मार्च 2026 को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पहुंचे, जहाँ उन्होंने नवनियुक्त जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक की। शमशाबाद हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कैबिनेट मंत्रियों ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसके बाद वे सीधे ‘गांधी भवन’ के लिए रवाना हुए। राहुल की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और 2029 के आम चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर पार्टी के कैडर को सक्रिय करना है। उन्होंने नए अध्यक्षों को स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी में अब केवल ‘काम करने वालों’ को ही जगह मिलेगी और चाटुकारिता का समय समाप्त हो चुका है। हैदराबाद की इस बैठक को दक्षिण भारत में कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव और ‘तेलंगाना मॉडल’ को पूरे देश में लागू करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी ने ‘जीत का मंत्र’ साझा करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि वे “नफरत के खिलाफ मोहब्बत” के संदेश को हर घर तक पहुँचाएं और जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को संगठन में 50 प्रतिशत भागीदारी देने पर जोर दिया ताकि पार्टी की छवि आधुनिक और समावेशी बनी रहे। राहुल ने अध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे सोशल मीडिया के साथ-साथ ‘डोर-टू-डोर’ कैंपेन पर ध्यान दें और भाजपा व बीआरएस के “भ्रामक प्रचार” का डटकर मुकाबला करें। उन्होंने तेलंगाना सरकार की ‘गारंटी योजनाओं’ की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम वादे पूरे करते हैं, तो जनता का अटूट विश्वास हमें मिलता है, और यही विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है। कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने नारा दिया कि “संगठन ही शक्ति है और एकता ही विजय का मार्ग है।”
हैदराबाद के इस दौरे ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि राहुल गांधी ने यहाँ जाति जनगणना (Caste Census) के मुद्दे पर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि तेलंगाना देश का पहला राज्य बनेगा जो पारदर्शी तरीके से डेटा जुटाकर संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित करेगा, जो पूरे देश के लिए एक नजीर होगा। विपक्षी दलों ने राहुल के इस दौरे को “राजनीतिक पर्यटन” करार दिया है, लेकिन कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि राहुल की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं का मनोबल सातवें आसमान पर है। बैठक के अंत में उन्होंने नए पदाधिकारियों के साथ व्यक्तिगत संवाद किया और उन्हें ‘पीपुल्स लीडर’ बनने की प्रेरणा दी। यह दौरा साफ संकेत देता है कि कांग्रेस अब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक मोड में है और दक्षिण भारत को अपना अभेद्य किला बनाने की तैयारी कर चुकी है।



