
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज, 6 मार्च 2026 को अरब सागर के करीब अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में गिरे अज्ञात बमों और रहस्यमयी धमाकों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब देश की समुद्री सीमाओं के पास इस तरह की संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं, तो रक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान क्यों नहीं आया? अखिलेश ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए पूछा कि क्या सरकार किसी बड़े खतरे को छिपाने की कोशिश कर रही है या फिर उसकी खुफिया एजेंसियां इस हलचल को भांपने में पूरी तरह विफल रही हैं? सपा प्रमुख के अनुसार, समंदर में गिरे ये बम केवल सैन्य अभ्यास का हिस्सा नहीं हो सकते, बल्कि यह किसी विदेशी ताकत की ओर से भारत की ‘सामरिक तैयारी’ को परखने की एक बड़ी साजिश हो सकती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरंत इस घटना पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि जनता को अपनी सुरक्षा के बारे में जानने का पूरा हक है।
अखिलेश यादव ने अपनी चिर-परिचित शैली में ‘डेटा और पारदर्शिता’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति और रक्षा सौदों की चमक-धमक केवल विज्ञापनों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इवेंट मैनेजमेंट में इतनी मशरूफ है कि उसे सीमाओं पर हो रही घुसपैठ और समुद्री हलचल की परवाह नहीं है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि “लाल आंखें” दिखाने का दावा करने वाली सरकार अब इस रहस्यमयी बमबारी पर खामोश क्यों है, क्या यह खामोश रहना किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव का नतीजा है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी घटनाएं तटीय राज्यों की सुरक्षा और वहां के मछुआरों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती हैं, जिन्हें अक्सर जानकारी के अभाव में अनहोनी का सामना करना पड़ता है। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में उठाने की चेतावनी दी है और रक्षा मंत्री से इस ‘खामोशी’ का राज खोलने की पुरजोर मांग की है।
बयान के अंतिम भाग में अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन सरकार को विपक्ष और जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों का पता नहीं लगाया गया, तो यह भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और संप्रभुता के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि क्या यह बमबारी ईरान-इजरायल के बीच चल रहे ताजा तनाव का कोई ‘साइड इफेक्ट’ है या फिर हिंद महासागर में किसी नई शक्ति का हस्तक्षेप? उन्होंने आह्वान किया कि सरकार को अपनी “चुप्पी” तोड़कर देश को भरोसे में लेना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों और डर का माहौल न बने। अखिलेश का यह हमला उस समय आया है जब सरकार पहले ही कई वैश्विक और आंतरिक मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे इस विवाद ने राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया है।



