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मुकुल राय का निधन: भारतीय राजनीति के एक अध्याय का अंत

पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक, मुकुल राय का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुकुल राय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक ऐसा जमीन से जुड़ा नेता बताया, जिनके पास संगठन कौशल की अद्भुत क्षमता थी। पीएम मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा कि मुकुल राय ने बंगाल की राजनीति को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और उनके समर्थकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

अमित शाह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुकुल राय के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें अपना एक पुराना और कर्मठ साथी बताया। शाह ने याद किया कि किस प्रकार मुकुल राय ने भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़कर बंगाल में पार्टी के विस्तार में अपना बहुमूल्य सहयोग दिया था। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुकुल राय जी का जाना बंगाल और देश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। वे चुनावी बारीकियों और संगठनात्मक ढांचे को समझने वाले एक विरल राजनेता थे।” गृह मंत्री ने प्रार्थना की कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें।

बंगाल की राजनीति में ‘चाणक्य’ की विदाई

मुकुल राय को बंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर कई बड़े राजनीतिक उलटफेर किए। वे यूपीए सरकार में रेल मंत्री के पद पर भी रहे और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें वे भाजपा में शामिल हुए और बाद में पुनः तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। उनके निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। मुकुल राय का जाना न केवल टीएमसी बल्कि पूरे बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा।

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