प्रधानमंत्री का ओमान दौरा: ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से सम्मानित और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की अपनी महत्वपूर्ण तीन देशों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और वे मस्कट से स्वदेश के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरे के अंतिम चरण में, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने प्रधानमंत्री मोदी को ओमान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ (प्रथम श्रेणी) से सम्मानित किया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत-ओमान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री ने इस गौरवशाली सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों और दोनों देशों की सदियों पुरानी अटूट मित्रता को समर्पित किया। विशेष बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी यह सम्मान प्राप्त करने वाले पहले भारतीय नेता बन गए हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद और अरब जगत के साथ प्रगाढ़ होते रिश्तों का परिचायक है।
यह यात्रा भारत और ओमान के बीच कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर हुई, जिसने इस दौरे को और भी यादगार बना दिया। मस्कट में सुल्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और डिजिटल नवाचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और विस्तार देने पर सहमति जताई। इसी दौरे के दौरान भारत और ओमान के बीच ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नया अध्याय लिखेगा। प्रधानमंत्री ने मस्कट में भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत की और ओमान के आर्थिक विकास में उनके योगदान की सराहना की। इस दौरान सुल्तान ने भारतीय प्रवासियों के प्रति अपने स्नेह और समर्थन को दोहराया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्ट को दर्शाता है।
‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक दुनिया भर के विभिन्न देशों से कुल 29 सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। इस तीन दिवसीय यात्रा ने न केवल पश्चिम एशिया और अफ्रीका के देशों के साथ भारत के संबंधों को नई ऊंचाई दी है, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज के रूप में भारत की भूमिका को और सशक्त किया है। ओमान से विदा होते समय प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सुल्तान के भाई ने विशेष रूप से ‘नमस्ते’ कहकर उन्हें विदाई दी, जो भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे सम्मान का प्रतीक था। प्रधानमंत्री की यह सफल यात्रा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट वेस्ट’ नीतियों की प्रभावशीलता को सिद्ध करती है, जिससे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और साझा प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।



