
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज पंजाब के बरनाला में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने अपने चिर-परिचित नारे “नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान” को दोहराते हुए कहा कि देश को इस समय जोड़ने वाली राजनीति की जरूरत है, न कि बांटने वाली। राहुल ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करके गरीब, किसान और मजदूरों की आवाज को दबाने का काम कर रहे हैं। बरनाला की इस रैली में उन्होंने पंजाब के किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा उनके हक की लड़ाई लड़ेगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के वादे से पीछे नहीं हटेगी। राहुल गांधी का यह संबोधन आगामी चुनावों के मद्देनजर पंजाब में कांग्रेस के आधार को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रैली के दौरान राहुल गांधी ने बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि आज देश की पूरी संपत्ति केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में सिमटती जा रही है। उन्होंने ‘अग्निपथ योजना’ को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया और दावा किया कि यह योजना सेना की ताकत और जवानों के आत्मसम्मान को कमजोर करने के लिए लाई गई है। राहुल ने पंजाब की मिट्टी की बहादुरी और भाईचारे की मिसाल देते हुए कहा कि यहाँ के लोग नफरत की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे और पंजाब हमेशा देश को मोहब्बत का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने ड्रग्स की समस्या और पंजाब के गिरते जलस्तर पर भी चिंता व्यक्त की और एक दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि राज्य की खुशहाली वापस लौट सके। भाषण के दौरान राहुल ने स्थानीय संस्कृति के साथ जुड़ाव दिखाते हुए कहा कि पंजाब उनके दिल में एक विशेष स्थान रखता है और वे यहाँ के लोगों के न्याय के लिए संसद से सड़क तक संघर्ष जारी रखेंगे।
बरनाला रैली में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर कांग्रेस खेमा गदगद है, जिसे पार्टी अपनी नीतियों के प्रति जनता के बढ़ते समर्थन के रूप में देख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी ने इस रैली के माध्यम से सिख समुदाय और किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जो पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार से नाराज चल रहे हैं। रैली में राहुल के साथ पंजाब कांग्रेस के तमाम बड़े नेता एक मंच पर दिखाई दिए, जो पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने का एक प्रयास था। भाजपा ने राहुल के “मोहब्बत की दुकान” वाले तंज पर पलटवार करते हुए इसे ‘भ्रम की दुकान’ करार दिया है और कांग्रेस पर सिखों के इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। बहरहाल, बरनाला की इस गर्जना ने पंजाब की सियासत में हलचल तेज कर दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में राज्य में राजनीतिक संघर्ष और अधिक तीव्र होने वाला है।



