विदेश

रूस-यूक्रेन युद्ध: सबसे भीषण हवाई हमला और ऊर्जा संकट का गहराता साया

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर विनाशकारी मोड़ ले लिया है। मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और समन्वित हवाई हमला किया है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के अनुसार, रूसी सेना ने रातों-रात यूक्रेन के 13 अलग-अलग क्षेत्रों पर 650 से अधिक ड्रोन और 30 से अधिक मिसाइलें दागीं। यह हमला विशेष रूप से यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाकर किया गया था। कड़ाके की ठंड और क्रिसमस के ठीक पहले हुए इस हमले का उद्देश्य देश की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप करना और जनता के मनोबल को तोड़ना माना जा रहा है।

इस भीषण हमले के कारण यूक्रेन के कई बड़े शहर और क्षेत्र अंधेरे में डूब गए हैं। रिव्ने, टेरनोपिल, ल्वीव और सुमी जैसे पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में ऊर्जा स्टेशनों के क्षतिग्रस्त होने के कारण आपातकालीन ‘ब्लैकआउट’ घोषित कर दिया गया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे “क्रिसमस के पहले मानवता पर प्रहार” बताया है। उन्होंने कहा कि यह हमला ऐसे समय में किया गया है जब शांति वार्ता को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, जो यह दर्शाता है कि रूस युद्ध रोकने का कोई वास्तविक इरादा नहीं रखता। हमले में अब तक एक चार वर्षीय बच्चे सहित 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ‘जनरल विंटर’ की रणनीति अपना रहा है, ताकि शून्य से नीचे गिरते तापमान में बिजली और हीटिंग काटकर यूक्रेन को घुटनों पर लाया जा सके। यूक्रेन की वायुसेना ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने 580 से अधिक ड्रोनों और अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया, अन्यथा तबाही का मंजर और भी भयानक हो सकता था। इस हमले के जवाब में पोलैंड ने भी अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमानों को तैनात किया। वर्तमान में, यूक्रेन के ऊर्जा कर्मी युद्धस्तर पर ग्रिड को बहाल करने में जुटे हैं, लेकिन व्यापक क्षति के कारण पूर्ण बहाली में लंबा समय लग सकता है।

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