बंगाल में सियासी रार: ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना पर ममता और बीजेपी आमने-सामने

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच तल्खी चरम पर पहुँच गई है। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य कोलकाता और आसपास के जिलों में कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष केंद्रों का निर्माण करना है। हालांकि, बीजेपी ने इसे केवल चुनावी स्टंट और तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल की संस्कृति और मां दुर्गा के प्रति राज्य की अटूट श्रद्धा को कभी समझ नहीं पाएगी। इस जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक वातावरण को गरमा दिया है, जहाँ दोनों पक्ष खुद को बंगाली अस्मिता और हिंदू संस्कृति का सबसे बड़ा संरक्षक साबित करने की होड़ में लगे हैं।
बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना के वित्तपोषण और इसके पीछे के वास्तविक उद्देश्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता के कर के पैसे का उपयोग धार्मिक ध्रुवीकरण और अपनी पार्टी के प्रचार के लिए कर रही है। बीजेपी का तर्क है कि राज्य में बुनियादी ढांचे, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को छिपाने के लिए ममता सरकार प्रतीकात्मक राजनीति का सहारा ले रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि यह परियोजना यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा दिए जाने के बाद बंगाल की कला को वैश्विक मंच पर और मजबूती प्रदान करेगी।
यह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी दोनों दलों के समर्थकों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। आगामी चुनावों को देखते हुए ‘दुर्गा आंगन’ अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जहाँ धर्म और संस्कृति के नाम पर वोट बैंक को साधने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी इस परियोजना के जरिए बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड की काट ढूंढने का प्रयास कर रही हैं। जैसे-जैसे परियोजना का काम आगे बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल की जनता इस सांस्कृतिक पहल को विकास के रूप में देखती है या राजनीतिक शतरंज की एक और चाल के रूप में। फिलहाल, राज्य में इस मुद्दे पर घमासान थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।



