
गाजियाबाद। जनपद में बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर को लेकर विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विद्युत निगम के अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाना पूरी तरह अनिवार्य होगा, लेकिन उपभोक्ता यह तय कर सकेंगे कि उन्हें ‘प्रीपेड’ सुविधा चाहिए या ‘पोस्टपेड’।
उपभोक्ताओं की पसंद को प्राथमिकता
अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह ने एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि स्मार्ट मीटर को प्रीपेड या पोस्टपेड मोड में रखने का अंतिम निर्णय उपभोक्ताओं के पास ही रहेगा। शासन स्तर से वर्तमान में जो गाइडलाइंस मिली हैं, उनके अनुसार उपभोक्ताओं को उनकी स्वेच्छा से विकल्प चुनने का अधिकार दिया जाएगा।
रिचार्ज के बाद भी बिजली न आने की समस्या का समाधान
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में रिचार्ज करने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल न होने की शिकायतों पर विभाग ने तकनीकी कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों के मुताबिक, डिस्कॉम और एमडीएम पोर्टल के बीच डेटा सिंक होने में देरी की वजह से ऐसी समस्याएं आती हैं। इसके समाधान के लिए विभाग मास्टर डेटा अपडेट कर रहा है, ताकि भुगतान होते ही तुरंत सप्लाई शुरू हो सके।
अब तक करीब 91 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70 हजार को प्रीपेड मोड पर शिफ्ट किया गया है।
- सरकारी कार्यालय: सरकारी आवासों और दफ्तरों के लिए सेंट्रलाइज्ड ई-वॉलेट सिस्टम बनाया गया है, जिससे उनका कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
- हेल्पलाइन और सुविधा: जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर अभी तक मीटर से लिंक नहीं हैं, विभाग उनकी सूची तैयार कर रहा है ताकि उन्हें समय पर अलर्ट भेजा जा सके।
विद्युत निगम की अपील:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निगेटिव बैलेंस होने पर बिजली कटने की स्थिति से बचने के लिए उपभोक्ता अपना मोबाइल नंबर जरूर अपडेट करवाएं। साथ ही, किसी भी तकनीकी समस्या के लिए विभागीय पोर्टल का सहारा लें।