काजीरंगा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: पीएम मोदी ने दी संरक्षण को नई धार, विकास और पर्यावरण का अनूठा संतुलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा नेशनल पार्क के संरक्षण के लिए एक महत्वाकांक्षी एलिफेंट और वाइल्डलाइफ कॉरिडोर परियोजना का शुभारंभ किया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर यातायात और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को कम करना है। अक्सर मानसून के दौरान, जब ब्रह्मपुत्र का पानी पार्क में भर जाता है, तो गैंडे, हाथी और अन्य जानवर सुरक्षित ऊंचाइयों (कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों) की ओर जाने की कोशिश करते हैं, जहाँ तेज रफ्तार वाहनों से उनकी जान को खतरा रहता है। यह नया कॉरिडोर जानवरों को एक ‘सुरक्षित मार्ग’ प्रदान करेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली वन्यजीवों की मृत्यु दर में भारी कमी आने की उम्मीद है।
तकनीकी रूप से यह परियोजना इंजीनियरिंग और पर्यावरण विज्ञान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें उन्नत एलीवेटेड रोड (फ्लाईओवर) और अंडरपास शामिल हैं, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि जानवरों का प्राकृतिक प्रवास बाधित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में मददगार साबित होगा, बल्कि यह क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत “प्रकृति और प्रगति” के बीच संतुलन बनाने के अपने संकल्प पर अडिग है। इस कॉरिडोर के निर्माण से स्थानीय समुदायों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, बिना जैव-विविधता को नुकसान पहुँचाए।
काजीरंगा प्रोजेक्ट के तहत केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट’ वन्यजीव निगरानी प्रणालियों (AI कैमरों और सेंसर) की स्थापना भी शामिल है। यह तकनीक पार्क प्रबंधन को वास्तविक समय में जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेगी। विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए एक मॉडल पेश करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस परियोजना के माध्यम से काजीरंगा को एक विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म हब बनाया जाए, जहाँ विकास की गति और प्रकृति की शांति साथ-साथ चल सकें। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।



