
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज, 6 मार्च 2026 को उस समय एक नया भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के नवनियुक्त राज्यपाल के कामकाज के तरीके पर बेहद कड़ा प्रहार किया। कोलकाता के ‘नबन्ना’ (सचिवालय) में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि “राजभवन अब संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि भाजपा का क्षेत्रीय कार्यालय बन गया है।” ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि नए राज्यपाल निर्वाचित सरकार के कामकाज में न केवल दखल दे रहे हैं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे आदेश जारी कर संघीय ढांचे का अपमान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बंगाल की जनता और उनकी सरकार इस “संवैधानिक अतिक्रमण” को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ी जाएगी। राजभवन और कालीघाट (मुख्यमंत्री आवास) के बीच जारी यह तनातनी अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक टकराव का रूप लेती दिख रही है।
ममता बनर्जी ने राज्यपाल द्वारा हाल ही में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति और राज्य की कानून-व्यवस्था पर की गई टिप्पणियों को “पूरी तरह राजनीति से प्रेरित” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजभवन का इस्तेमाल विपक्षी दलों की आवाज दबाने और भाजपा के एजेंडे को लागू करने के लिए किया जा रहा है? तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली से “रिमोट कंट्रोल” के जरिए बंगाल को चलाने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने पिछले राज्यपालों के साथ हुए विवादों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा बार-बार राजभवन को एक ‘समानांतर सरकार’ (Parallel Government) के केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करती है। ममता बनर्जी ने यह भी संकेत दिया कि यदि राज्यपाल ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो राज्य सरकार विधानसभा में उनके अधिकारों को सीमित करने के लिए नए विधायी कदम उठाने पर विचार कर सकती है।
इस विवाद के बीच, राज्यपाल कार्यालय ने भी एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा है कि वे केवल संविधान के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और उनका उद्देश्य राज्य में “पारदर्शिता और सुशासन” सुनिश्चित करना है। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों की भूमिका पर कभी सवाल नहीं उठते, लेकिन बंगाल में उन्हें हर छोटे मुद्दे पर घेरा जाता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी विपक्षी शासित राज्यों को एकजुट होकर राजभवन के “राजनीतिकरण” के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा बची रहे। बंगाल की सड़कों पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के पुतले फूंककर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल काफी गर्मा गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद दिल्ली के गलियारों तक पहुँचने की संभावना है, जहाँ ममता बनर्जी इस मुद्दे को राष्ट्रपति के समक्ष भी उठा सकती हैं।



