
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज, 2 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के रैदिघी (दक्षिण 24 परगना) से भाजपा की महत्वाकांक्षी ‘परिवर्तन यात्रा’ के दूसरे चरण का शंखनाद कर रहे हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए अमित शाह का यह दौरा राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जहाँ वे ममता सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प दोहराएंगे। भाजपा ने इस बार ‘पल्टानो दरकार, चाई बीजेपी सरकार’ (बदलाव की जरूरत है, भाजपा सरकार चाहिए) के नारे के साथ पूरे राज्य में 5,000 किलोमीटर लंबी यात्रा की योजना बनाई है। शाह की इस रैली में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, जिसे संबोधित करते हुए वे भ्रष्टाचार, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सीधी चुनौती देंगे। इस यात्रा का उद्देश्य बंगाल के हर ब्लॉक तक पहुँचकर लोगों को केंद्र की विकास योजनाओं और भाजपा के ‘सोनार बांग्ला’ के विजन से जोड़ना है।
अमित शाह ने अपने संबोधन के मुख्य बिंदुओं में ‘घुसपैठ’ को बंगाल के विकास और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा कांटा बताया है और वादा किया है कि भाजपा की सरकार बनते ही सीमा पर अभेद्य दीवार खड़ी की जाएगी। उन्होंने संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे को पूरी तरह विफल करार दिया है। शाह ने आरोप लगाया कि बंगाल आज “आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह” बन चुका है और यहाँ की जनसांख्यिकी को वोट बैंक की राजनीति के लिए जानबूझकर बदला जा रहा है। गृह मंत्री ने बंगाल के मतुआ समुदाय और ओबीसी वर्गों को लुभाने के लिए सीएए (CAA) के प्रभावी कार्यान्वयन और आरक्षण के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की। उनकी यह रणनीति साफ तौर पर राज्य के उन हिस्सों को साधने की है जहाँ पिछले चुनावों में भाजपा ने बढ़त हासिल की थी और इस बार इसे ‘पूर्ण बहुमत’ में बदलने का लक्ष्य है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, अमित शाह की इस ‘एंट्री’ ने टीएमसी के रणनीतिकारों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि भाजपा इस बार बूथ स्तर पर ‘पन्ना प्रमुखों’ की मजबूत फौज के साथ मैदान में उतरी है। ‘परिवर्तन यात्रा’ के तहत बंगाल के 294 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 300 छोटी और 64 बड़ी जनसभाएं करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका समापन मार्च के अंत में पीएम मोदी की विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड रैली से होगा। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को “अंतिम लड़ाई” का मंत्र देते हुए कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता और संस्कृति को बचाने का चुनाव है। बंगाल की तपिश के बीच शाह का यह आक्रामक रुख यह स्पष्ट करता है कि भाजपा ने मिशन 2026 के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी के ‘गढ़’ में भाजपा के इस ‘परिवर्तन’ के आह्वान को कितना स्वीकार करती है।



