राजनीतिराष्ट्रीय

जंग के बीच मोदी की बड़ी बैठक: भारत ने दुनिया को दिया शांति का ‘अंतिम संदेश’

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान पर हुए हालिया हमलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2026 की देर रात एक उच्चस्तरीय कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक बुलाई। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित एनएसए अजीत डोभाल ने क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति और वहां फंसे करीब 96 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर मंथन किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि आज का युग युद्ध का नहीं है और किसी भी समस्या का समाधान केवल ‘संवाद और कूटनीति’ से ही संभव है। बैठक के तुरंत बाद पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात कर “अत्यधिक संयम” बरतने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। भारत का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह वैश्विक संघर्षों में किसी एक पक्ष के बजाय मानवता और शांति के पक्ष में खड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन और कूटनीतिक वार्ताओं में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि “मानवता कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं होनी चाहिए।” भारत ने आधिकारिक तौर पर गज़ा शांति पहल (Gaza Peace Initiative) का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बताया है। बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो खाड़ी देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा’ की तर्ज पर एक बड़ा निकासी अभियान शुरू किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने पहले ही ईरान और इजरायल में रह रहे भारतीयों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी कर दी है और हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए हैं। भारत का यह “शांति संदेश” न केवल युद्ध विराम की अपील है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमाण भी है, जो आर्थिक हितों से ऊपर मानवीय मूल्यों को रखता है।

इस हाई-लेवल बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय गलियारों में भारत की मध्यस्थता की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों के साथ रणनीतिक रूप से संतुलित हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अटल है, लेकिन निर्दोषों की जान की कीमत पर कोई भी सैन्य कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात दोहराई है, जो परोक्ष रूप से संघर्षरत देशों को संयम बरतने की चेतावनी है। जैसे-जैसे वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में उछाल का डर बढ़ रहा है, मोदी की यह शांति पहल न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए है, बल्कि पूरी दुनिया को विनाशकारी तीसरे विश्व युद्ध की आहट से बचाने का एक ईमानदार प्रयास भी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button