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बजट के बाद महामंथन: ‘विकसित भारत’ के लिए पीएम मोदी का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 27 फरवरी 2026 को, “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर आयोजित पहले बजट-पश्चात वेबिनार (Post-Budget Webinar) को संबोधित कर रहे हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा आयोजित वेबिनार श्रृंखला में यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण सत्र है। पीएम मोदी का यह संबोधन मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे तकनीक और वित्तीय सुधारों के संगम से भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है। इस महामंथन में उद्योग जगत के दिग्गज, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और शिक्षाविद् एक साथ जुटे हैं ताकि बजट में प्रस्तावित सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Public Capex) और बुनियादी ढांचे के विकास को धरातल पर उतारा जा सके।

वेबिनार के दौरान चर्चा के मुख्य बिंदुओं में बैंकिंग क्षेत्र के सुधार, पूंजी बाजार को गहरा करना और कर सुधारों के माध्यम से ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देना शामिल है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य की नींव है, जिसे तकनीक के माध्यम से पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जाना चाहिए। सरकार का लक्ष्य पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए बजट घोषणाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इस वेबिनार में भाग लेने वाले विभिन्न हितधारकों को संबोधित करते हुए पीएम ने आह्वान किया कि वे नवाचार और निवेश के नए रास्ते खोजें ताकि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक मजबूत केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर सके।

दूसरी ओर, विपक्ष ने इन वेबिनारों को केवल एक ‘पीआर एक्सरसाइज’ करार देते हुए बजट की आलोचना जारी रखी है, लेकिन बाजार और आर्थिक विशेषज्ञों ने इस पहल को सकारात्मक बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026-27 में प्रस्तावित 12.2 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय को सही दिशा में ले जाने के लिए यह वेबिनार एक रोडमैप की तरह काम करेगा। तकनीकी सुधारों, विशेषकर एमएसएमई (MSMEs) के लिए नई क्रेडिट गारंटी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के जोखिम विकास कोष (Infrastructure Risk Development Fund) के सही इस्तेमाल पर आज गहन मंथन हो रहा है। यह वेबिनार स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव और फीडबैक पर भी उतनी ही गंभीरता से नजर रख रही है।

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