
हरियाणा कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार के खिलाफ एक अनोखा और आक्रामक ‘झुनझुना’ मार्च निकालकर राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने हाथों में बच्चों के खेलने वाले ‘झुनझुने’ लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले दस सालों में मौजूदा सरकार ने राज्य की जनता को विकास के नाम पर केवल खोखले वादे और विज्ञापनों का ‘झुनझुना’ थमाया है। यह मार्च रोहतक से शुरू होकर चंडीगढ़ की ओर बढ़ा, जिसमें युवाओं, किसानों और महिलाओं की भारी भागीदारी देखी गई। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि जनता अब सरकार की ‘डबल इंजन’ वाली बातों के झांसे में आने वाली नहीं है।
इस मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बेरोजगारी, पेपर लीक और पोर्टल आधारित शासन व्यवस्था को अपना मुख्य निशाना बनाया है। दीपेंद्र हुड्डा ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा जो कभी प्रति व्यक्ति आय और विकास में नंबर वन था, आज बेरोजगारी और अपराध में शीर्ष पर पहुंच गया है। कांग्रेस का तर्क है कि ‘परिवार पहचान पत्र’ और ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ जैसे पोर्टल जनता के लिए सुविधा नहीं बल्कि दुविधा बन गए हैं, जिससे बुजुर्गों की पेंशन और गरीबों के राशन कार्ड कट रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से सरकारी घोषणाओं की प्रतियों को झुनझुने के साथ बांधकर यह दिखाया कि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगा।
दूसरी ओर, सत्ताधारी भाजपा ने कांग्रेस के इस ‘झुनझुना’ मार्च को हताशा में किया गया ‘सियासी स्टंट’ करार देते हुए इसका मजाक उड़ाया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज ने पलटवार करते हुए कहा कि जिनके अपने कार्यकाल में केवल ‘पर्ची-खर्ची’ का बोलबाला था, वे आज पारदर्शिता वाली सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे ड्रामे कर रही है। सरकार के अनुसार, हरियाणा में आज बिना किसी भेदभाव के नौकरियां मिल रही हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है, जिससे विपक्षी दल बौखलाए हुए हैं। इस मार्च ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हरियाणा की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है, जहाँ दोनों दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।



