
असम की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के निवर्तमान अध्यक्ष भूपेन बोरा आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य मिलन समारोह में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। बोरा के साथ कांग्रेस के कई जिला अध्यक्ष और सैकड़ों कार्यकर्ता भी भाजपा का दामन थाम चुके हैं, जिसे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा ‘विनाशकारी’ झटका माना जा रहा है। भाजपा में शामिल होते ही भूपेन बोरा ने कहा कि कांग्रेस अब केवल एक “भ्रमित संगठन” रह गई है, जिसके पास राज्य के विकास के लिए कोई स्पष्ट दृष्टि या नीति नहीं है।
“नेतृत्व की विफलता” और आंतरिक कलह का खुलासा
भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे केंद्रीय नेतृत्व की उदासीनता और पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी को मुख्य कारण बताया। उन्होंने खुलासा किया कि वह पिछले काफी समय से राहुल गांधी और वरिष्ठ नेताओं को राज्य की जमीनी हकीकत से अवगत कराने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। बोरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब केवल कुछ “खास चेहरों” (जैसे गौरव गोगोई) के ईर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है, जिससे पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और हिमंत बिस्वा सरमा की “सशक्त कार्यशैली” की सराहना करते हुए कहा कि असम का भविष्य केवल भाजपा के हाथों में ही सुरक्षित है।
असम की राजनीतिक बिसात पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भूपेन बोरा का भाजपा में जाना असम में विपक्ष की कमर तोड़ने जैसा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरा का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से “असम को घुसपैठ मुक्त और विकसित बनाने” के मिशन को और मजबूती मिलेगी। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेतृत्व सदमे में है और उसने बोरा को “गद्दार” करार देते हुए उन पर सत्ता के लालच में विचारधारा से समझौता करने का आरोप लगाया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह टूट केवल असम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की कांग्रेस इकाइयों पर भी पड़ना तय है।



