
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Indo-US Trade Deal) को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब व्यक्तिगत चुनौती तक पहुँच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 15 फरवरी 2026 को गांधीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। शाह ने राहुल गांधी पर देश के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को “झूठ बोलकर गुमराह” करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते में भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की 100% सुरक्षा सुनिश्चित की है। शाह ने राहुल गांधी के आरोपों को “हास्यास्पद” करार देते हुए कहा कि जो लोग ‘डंकल प्रस्ताव’ के समय चुप थे, वे आज किसानों के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने इस विवाद को एक कदम आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस (Public Debate) की सीधी चुनौती दी। शाह ने कहा, “राहुल गांधी जी, आप कोई भी मंच चुन लें, भाजपा का एक ‘युवा मोर्चा अध्यक्ष’ भी आपसे इस विषय पर बहस करने के लिए तैयार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता एक “झूठ की फैक्ट्री” चला रहे हैं और रोजाना नए भ्रम फैला रहे हैं। अमित शाह ने डेटा और आंकड़ों के हवाले से बताया कि मोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में यूपीए सरकार की तुलना में 15 गुना अधिक अनाज एमएसपी (MSP) पर खरीदा है और कृषि बजट को 26,000 करोड़ से बढ़ाकर 1.29 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
इस पलटवार के दौरान शाह ने डेयरी क्षेत्र के मुद्दे पर भी रुख स्पष्ट किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत का डेयरी उद्योग इस समझौते से कमजोर नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों तक पहुँचने से और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे समझौते के दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें, बजाय इसके कि वे सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाएं। अमित शाह की इस “खुली चुनौती” ने व्यापार समझौते की इस बहस को अब सीधे चुनावी अखाड़े में ला खड़ा किया है, जहाँ भाजपा इसे ‘विकास बनाम झूठ’ की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।



