
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज, 18 फरवरी 2026 को पश्चिम बंगाल के एक दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर हैं, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए ‘मिशन 2026’ का शंखनाद माना जा रहा है। कोलकाता पहुँचने के बाद, शाह नदिया जिले के मायापुर स्थित इस्कॉन (ISKCON) मुख्यालय जाएंगे, जहाँ वे श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती समारोह में सम्मिलित होंगे। इस यात्रा के दौरान वे मंदिर परिसर में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे और इस्कॉन के आध्यात्मिक नेताओं के साथ बैठक करेंगे। राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को मतुआ समुदाय और सीमावर्ती क्षेत्रों के मतदाताओं को साधने की बीजेपी की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, साथ ही शाह शाम को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठनात्मक मजबूती पर मंथन भी करेंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने असम में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए ‘प्रियंका गांधी मिशन’ पर दांव लगाया है। प्रियंका गांधी वाड्रा को असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है, जो पार्टी के भीतर उनके बढ़ते कद और असम के प्रति केंद्रीय नेतृत्व की गंभीरता को दर्शाता है। यह पहली बार है जब प्रियंका गांधी को किसी राज्य में उम्मीदवारों के चयन की इतनी निर्णायक जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे जल्द ही असम का दौरा कर गौरव गोगोई और स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार करेंगी। कांग्रेस का लक्ष्य प्रियंका की ‘इमेज’ और उनके आक्रामक रुख के जरिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की घेराबंदी करना और गठबंधन को मजबूती प्रदान करना है।
इन दोनों दिग्गज नेताओं की सक्रियता ने 2026 के चुनावी समर को अभी से गरमा दिया है। जहाँ अमित शाह बंगाल में घुसपैठ और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को धार देकर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना रहे हैं, वहीं प्रियंका गांधी असम में ‘युवा नेतृत्व’ और ‘बदलाव’ के नारे के साथ कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश कर रही हैं। इन दौरों से स्पष्ट है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के इन दो राज्यों को आगामी राजनीतिक दिशा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। एक तरफ हिंदुत्व और विकास का एजेंडा है, तो दूसरी तरफ संगठनात्मक सुधार और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ बनाने की चुनौती।



