
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 13वें संसदीय चुनाव में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। निर्वासन से लौटे नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी ने दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर सत्ता में शानदार वापसी की है। रिपोर्टों के अनुसार, बीएनपी और उसके सहयोगियों ने 299 सीटों में से 200 से अधिक सीटों पर कब्जा कर लिया है। यह जीत न केवल बीएनपी के लिए दो दशकों के लंबे इंतजार का अंत है, बल्कि शेख हसीना के शासन के पतन के बाद देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी है। तारिक रहमान ने खुद ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की है, जिससे उनका अगला प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है।
इस चुनाव को बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद हुए इन पहले चुनावों में जनता ने बीएनपी पर अपना भरोसा जताया है। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत लगभग 59.44% रहा, जो चुनौतीपूर्ण सुरक्षा स्थितियों के बावजूद एक सकारात्मक भागीदारी को दर्शाता है। मुख्य विपक्षी दल के रूप में जमात-ए-इस्लामी उभरा है, जिसने लगभग 70 सीटें जीती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार तीन दशकों में पहली बार अवामी लीग का चुनावी चिन्ह ‘नौका’ नदारद था, क्योंकि पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने की तैयारी कर रहे तारिक रहमान ने इस जीत को जनता की जीत बताया है। उन्होंने एक ‘नए बांग्लादेश’ का विजन पेश किया है, जिसमें भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता और सत्ता के विकेंद्रीकरण का वादा किया गया है। चुनाव के साथ ही देश में एक संवैधानिक जनमत संग्रह भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता जैसे सुधारों पर जनता की राय मांगी गई। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित वैश्विक नेताओं ने तारिक रहमान को इस निर्णायक जीत पर बधाई दी है, जिससे आने वाले समय में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।



