
बजट 2026 के पेश होने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया। विशेष बजट सत्र के दौरान सेंसेक्स करीब 1,500 से 2,300 अंकों तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट के कारण महज एक दिन में निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई। बाजार की इस तीव्र प्रतिक्रिया ने बजट के प्रति ट्रेडर्स की तत्काल निराशा को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।
गिरावट का सबसे बड़ा कारण फ्यूचर और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में की गई भारी वृद्धि को माना जा रहा है। वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स पर टैक्स को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले से ट्रेडिंग लागत काफी बढ़ जाएगी, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और हाई-फ्रीक्वेंसी निवेशकों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। बाजार को उम्मीद थी कि सरकार इस बार टैक्स में राहत देगी, लेकिन इसके विपरीत टैक्स बढ़ने से सेंटीमेंट पूरी तरह बिगड़ गया।
इसके अलावा, बैंकिंग, मेटल और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। SBI, अडाणी पोर्ट्स और टाटा स्टील जैसे बड़े शेयरों में 5% तक की गिरावट आई। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया गया है, लेकिन डेरिवेटिव्स बाजार पर बढ़े टैक्स के बोझ ने सकारात्मक घोषणाओं को धुंधला कर दिया। बाजार अब इस झटके से उबरने के लिए स्थिरता और भविष्य के संस्थागत निवेश (FII) के रुख की प्रतीक्षा कर रहा है।



