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भारत-EU ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: 18 साल का इंतजार खत्म, 27 देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापारिक संधि पर लगी मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की। इस संधि को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह 2 अरब से अधिक लोगों के बाजार को आपस में जोड़ता है और वैश्विक जीडीपी के लगभग 25% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। समझौते के तहत, भारत अपने 92.1% टैरिफ लाइनों (वस्तुओं) पर शुल्क कम या खत्म करेगा, जबकि यूरोपीय संघ भारत के 99% निर्यात के लिए अपने बाजार पूरी तरह खोल देगा। पीएम मोदी ने इस डील को वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए ‘डबल इंजन’ बताया है, जो आने वाले दशकों में व्यापार की नई दिशा तय करेगा।

इस समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था के श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामानों को भारी लाभ होगा। यूरोपीय संघ में इन उत्पादों पर लगने वाले 22% तक के शुल्क अब शून्य हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को सालाना अरबों डॉलर की बचत होगी। दूसरी ओर, भारत ने यूरोपीय कारों पर टैरिफ 110% से घटाकर 10% करने (निर्धारित कोटा के तहत) और वाइन, बीयर व जैतून के तेल (Olive Oil) पर लगने वाले भारी शुल्क में बड़ी कटौती करने पर सहमति जताई है। विशेष रूप से, आईटी और पेशेवर सेवाओं (Services) के क्षेत्र में 144 सब-सेक्टरों में भारतीय पेशेवरों को यूरोप में काम करने और सेवा देने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

व्यापार के अलावा, इस समझौते में जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए एक विशेष अध्याय जोड़ा गया है। यूरोपीय संघ अगले दो वर्षों में भारत के ग्रीन ट्रांजिशन और उत्सर्जन कटौती के लिए €500 मिलियन (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) की सहायता प्रदान करेगा। यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के लिए भी नए रणनीतिक समझौते शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संधि से 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर $250 बिलियन के पार पहुँच जाएगा। यह समझौता चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने और भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

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