रिलायंस को झटका, सेल की धूम: शेयर बाजार में आज दिखा मिला-जुला असर

भारतीय शेयर बाजार में आज, 6 जनवरी 2026 को दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही रिलायंस का शेयर करीब 3.82% तक लुढ़क कर ₹1,517.80 के स्तर पर आ गया, जो पिछले सत्र के ऑल-टाइम हाई ₹1,611.80 से एक बड़ी गिरावट है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण ब्रोकरेज फर्म CLSA द्वारा रिलायंस को अपने ‘इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो’ से बाहर करना और रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर फैली अफवाहों का कंपनी द्वारा खंडन करना माना जा रहा है। साथ ही, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल संकट और भारत पर बढ़ते टैरिफ के दबाव ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, जिससे रिलायंस आज निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहा।
रिलायंस के विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज स्टील कंपनी सेल (SAIL) के लिए यह समय काफी उत्साहजनक बना हुआ है। सेल ने दिसंबर 2025 में 2.1 मिलियन टन (MT) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 37% अधिक है। यह कंपनी के इतिहास में किसी भी दिसंबर महीने के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। [Image showing SAIL’s record 37% sales growth graph for December] इस शानदार प्रदर्शन और सरकार द्वारा स्टील आयात पर लगाए गए 12% सुरक्षा शुल्क (Safeguard Duty) के कारण निवेशकों का भरोसा सेल पर बढ़ा है। सोमवार को इसके शेयर 2.45% की तेजी के साथ ₹151 के स्तर पर बंद हुए थे, और आज भी बाजार में इसकी मजबूती पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर रिलायंस जहाँ शॉर्ट-टर्म जियोपॉलिटिकल तनाव और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के कारण दबाव में है, वहीं दूसरी ओर सेल को बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में बढ़ती मांग का सीधा फायदा मिल रहा है। रिलायंस ने स्पष्ट किया है कि उसके जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल की कोई नई खेप नहीं आ रही है, फिर भी टैरिफ की चिंताएं बाजार पर हावी हैं। वहीं सेल की सूची में घरेलू मांग और निर्यात दोनों में वृद्धि देखी जा रही है, जो इसे मेटल सेक्टर का ‘आउटपरफॉर्मर’ बना रही है। मौजूदा बाजार की स्थिति दिखाती है कि निवेशक अब उन क्षेत्रों की ओर झुक रहे हैं जहाँ सरकारी नीतियों और मांग में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है।



