धार्मिक

माघ मेला 2026: संगम तट पर आस्था का सैलाब, कड़ाके की ठंड में ‘पुण्य’ की डुबकी

प्रयागराज की पावन धरा पर आज से माघ मेला-2026 का औपचारिक और भव्य शुभारंभ हो गया है। संगम के रेतीले तट पर कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद, तड़के सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु और कल्पवासी पवित्र त्रिवेणी (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) के संगम पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के उद्घोष से पूरा मेला क्षेत्र गुंजायमान है। मेला प्रशासन के अनुसार, आज पहले मुख्य स्नान पर्व के अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संगम तट पर भारी भीड़ को देखते हुए डीप वॉटर बैरिकेडिंग की गई है और जल पुलिस के साथ-साथ गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपना अनुष्ठान पूरा कर सकें।


आगामी महाकुंभ 2027 के रिहर्सल के रूप में देखे जा रहे इस माघ मेले में इस बार अभूतपूर्व सुविधाएं प्रदान की गई हैं। पूरे मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 10 से अधिक पक्के घाट तैयार किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मेले में अस्थाई अस्पतालों और एम्बुलेंस की व्यवस्था की है, जबकि चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है। संगम की रेती पर तंबुओं का एक नया शहर बस गया है, जहाँ देश के कोने-कोने से आए साधु-संत और कल्पवासी एक महीने के कठिन ‘कल्पवास’ का संकल्प लेकर पहुंचे हैं। ‘कल्पवास’ की परंपरा के तहत श्रद्धालु जमीन पर शयन करते हैं और दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण कर आत्मिक शांति की तलाश करते हैं।


धार्मिक महत्व के साथ-साथ, इस बार माघ मेले को ‘स्वच्छ और सुरक्षित मेला’ के रूप में प्रमोट किया जा रहा है। घाटों पर सफाई के लिए विशेष टीमें तैनात हैं और ‘एकल उपयोग प्लास्टिक’ (Single-use Plastic) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। रेलवे और परिवहन विभाग ने श्रद्धालुओं की वापसी के लिए मेला स्पेशल ट्रेनों और बसों के फेरे बढ़ा दिए हैं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल का माघ मेला तकनीक और परंपरा का एक अनूठा संगम होगा, जहाँ डिजिटल बोर्ड्स के माध्यम से श्रद्धालुओं को मौसम और स्नान के शुभ मुहूर्त की जानकारी दी जा रही है। सूर्योदय के साथ शुरू हुआ यह भक्ति का उत्सव अब पूरे एक माह तक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना रहेगा।

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