बांग्लादेश संकट: शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने उठाई हिंदू अल्पसंख्यकों के हक में आवाज

अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे लगातार अत्याचारों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मानवता और इस्लाम किसी भी निर्दोष व्यक्ति पर जुल्म की इजाजत नहीं देते। बांग्लादेश में हाल के हफ्तों में जिस तरह से हिंदू समुदायों के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है, वह बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए एक बड़ा कलंक है और इसे तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए।
बोर्ड ने भारत सरकार से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को और अधिक पुरजोर तरीके से उठाए ताकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बनाया जा सके। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार, एक लोकतांत्रिक ढांचे में अल्पसंख्यकों का संरक्षण सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसमें वर्तमान ‘यूनुस सरकार’ विफल नजर आ रही है। बोर्ड ने यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी समुदायों के बीच आपसी विश्वास और सुरक्षा का होना अनिवार्य है। मुस्लिम विद्वानों और बोर्ड के सदस्यों ने वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से भी इस मामले में दखल देने और जमीनी स्तर पर जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस संकट की घड़ी में, बोर्ड ने बांग्लादेशी कट्टरपंथियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मजहब के नाम पर की जा रही यह हिंसा वास्तव में मजहब की ही छवि को धूमिल कर रही है। मुरादनगर और देश के अन्य हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, शिया बोर्ड का यह रुख सांप्रदायिक सद्भाव और साझा मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बोर्ड ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को समझेगी और वहां के हिंदू नागरिकों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के लिए ठोस कानूनी कदम उठाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठन बांग्लादेश में जारी मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।



