दृष्टि और आयुर्वेद: आयुष मंत्रालय ने साझा किए ‘पादाभ्यंग’ के चमत्कारी लाभ

आयुष मंत्रालय ने प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित करते हुए आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए ‘पादाभ्यंग’ (पैरों के तलवों की तेल मालिश) के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारे पैरों के तलवों का सीधा संबंध हमारी दृष्टि (Eyesight) से होता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तलवों में विशेष ‘मर्म बिंदु’ और नसें होती हैं, जिन्हें ‘चक्षुष्या’ कहा जाता है। नियमित रूप से सोने से पहले पैरों की मालिश करने से इन नसों को पोषण मिलता है, जिससे न केवल आंखों की थकान कम होती है, बल्कि लंबे समय में दृष्टि की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पादाभ्यंग के लिए तिल का तेल, गाय का घी या औषधीय क्षीरबाला तेल का उपयोग सबसे प्रभावी माना जाता है। मालिश की प्रक्रिया में तलवों के साथ-साथ पैर की उंगलियों के जोड़ों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो शरीर के ‘पित्त दोष’ को संतुलित करने में मदद करता है। चूंकि आंखें पित्त प्रधान अंग मानी जाती हैं, इसलिए शरीर की अतिरिक्त गर्मी को पैरों के माध्यम से बाहर निकालने से आंखों में जलन, सूखापन (Dry Eyes) और धुंधलेपन की समस्या कम होती है। मंत्रालय ने इसे आज की डिजिटल जीवनशैली में ‘स्क्रीन टाइम’ के कारण होने वाले तनाव को कम करने का एक सरल और सस्ता उपाय बताया है।
आंखों की रोशनी के अलावा, पादाभ्यंग के अन्य व्यापक लाभ भी साझा किए गए हैं। यह अभ्यास अनिद्रा (Insomnia) को दूर करने, मानसिक शांति प्रदान करने और पैरों के दर्द व सूजन को कम करने में सहायक है। आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है कि सर्वोत्तम परिणामों के लिए रात को सोने से पहले 5 से 10 मिनट तक कांसे की कटोरी या हाथों से तलवों की मालिश करनी चाहिए। यह छोटी सी आयुर्वेदिक दिनचर्या न केवल आंखों को स्वस्थ रखती है, बल्कि पूरे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को मजबूती प्रदान करती है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य लोगों को रसायनों के बजाय प्राकृतिक और पारंपरिक उपचारों की ओर प्रोत्साहित करना है।



