स्वास्थ्य

टीबी मुक्त गाजियाबाद: 20 हजार मरीजों की सघन जांच और बच्चों पर विशेष ध्यान

गाजियाबाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को सिद्ध करने के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। इस विशेष अभियान के तहत जिले भर में लगभग 20,000 टीबी मरीजों और संदिग्धों की सघन जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर और मोबाइल वैन के जरिए स्क्रीनिंग कर रही हैं, ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। अभियान का मुख्य उद्देश्य उन ‘छिपे हुए’ मरीजों की पहचान करना है जो लक्षणों के बावजूद इलाज के दायरे से बाहर हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में पंजीकृत और नए खोजे गए मरीजों का उपचार सरकारी निगरानी में निःशुल्क शुरू कर दिया गया है।

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बच्चों में टीबी की पहचान करना है, जिसके लिए 1,371 बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर स्क्रीनिंग में शामिल किया गया है। चूंकि 8 साल से कम उम्र के बच्चे अक्सर बलगम (Sputum) का नमूना नहीं दे पाते, इसलिए उनके लिए आधुनिक ‘गैस्ट्रिक एस्पिरेट’ और ‘इंडयूज्ड स्पूटम’ जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए गाजियाबाद के एमएमजी (MMG) अस्पताल और अन्य बाल रोग विशेषज्ञों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बच्चों में समय पर पहचान और पोषण की कमी को दूर करके ही भविष्य की पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है।

प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने के लिए ‘निक्षय मित्र’ पहल को भी जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से टीबी मरीजों को सामाजिक और पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद में टीबी यूनिट्स की संख्या बढ़ाई जा रही है और खोड़ा व लोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नई सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। मरीजों को समय पर दवा मिले, इसके लिए ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के जरिए निक्षय पोषण योजना का लाभ भी सीधे उनके खातों में भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक खांसी या बुखार हो, तो वे तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त जांच कराएं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button