संसद में गहमागहमी: ग्रामीण रोजगार के लिए नया ‘VB G-RAM-G’ विधेयक

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज लोकसभा में भारी गहमागहमी रहने की संभावना है, क्योंकि सरकार एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक ‘VB G-RAM-G’ (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) चर्चा के लिए पेश कर सकती है। यह विधेयक केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत’ कार्ययोजना का एक प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना और गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है। सत्ता पक्ष इसे ग्रामीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इस पर तीखी बहस की तैयारी में है।
इस विधेयक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ग्रामीण परिवारों को साल में न्यूनतम 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है। वर्तमान में लागू मनरेगा (MGNREGA) के 100 दिनों के प्रावधान की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण विस्तार है। ‘VB G-RAM-G’ के तहत न केवल कार्य दिवसों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि आजीविका मिशन के माध्यम से कौशल विकास और स्थायी रोजगार के अवसरों पर भी जोर दिया गया है। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि काम की मांग करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा, जो इसकी जवाबदेही को और मजबूत बनाता है।
सदन में इस बिल पर चर्चा के दौरान बजट आवंटन और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विपक्षी दलों द्वारा कई सवाल उठाए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो यह ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में व्यापक बदलाव ला सकता है। यह न केवल ग्रामीण आय में वृद्धि करेगा बल्कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी सहायक होगा। सभी की निगाहें अब सदन की कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को बिना किसी बड़े अवरोध के पारित कराने में सफल हो पाती है।



