वायु गुणवत्ता संकट: गाजियाबाद में AQI 379, ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 379 दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानदंडों के अनुसार, AQI की यह रीडिंग ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी के अंतर्गत आती है, जो शहर के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है। यह खतरनाक स्तर की वायु गुणवत्ता मुख्य रूप से वाहनों के प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसमी कारणों जैसे शांत हवाओं और कोहरे के कारण बनी हुई है, जो प्रदूषकों को हवा की निचली परतों में रोक कर रखती है।
‘बहुत खराब’ श्रेणी का AQI सीधे तौर पर श्वसन संबंधी बीमारियों (Respiratory Illnesses) और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। खासकर, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह हवा अत्यंत हानिकारक है। इस स्तर पर, लंबे समय तक बाहर रहने पर लोगों को साँस लेने में कठिनाई, आँखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने गाजियाबाद के नागरिकों को सलाह दी है कि वे जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और बाहर निकलते समय N95 या उससे ऊपर के मास्क का उपयोग करें।
वायु प्रदूषण के इस गंभीर स्तर को देखते हुए, प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना, पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगाना और एंटी-स्मॉग गन जैसे उपायों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना शामिल है। यह स्थिति शहर के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए एक आपातकाल जैसी है, जिसके लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों तरह की रणनीतियों पर काम करना जरूरी है ताकि गाजियाबाद को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।



