
अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में कटौती किए जाने की खबर ने वैश्विक और भारतीय शेयर बाजार के मिजाज को अचानक बदल दिया है। फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती किए जाने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था, जिसने निवेशकों के बीच एक सकारात्मक माहौल बनाया। इस फैसले के तुरंत बाद, भारतीय बाजार में एक बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली। दिन की शुरुआत में, वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में मामूली गिरावट (लाल निशान) दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक फेड के अगले कदम को लेकर सतर्क थे।
हालांकि, जैसे ही फेड के बयान में नरम रुख (Dovish Stance) के संकेत मिले और यह स्पष्ट हुआ कि आगे भी दरों में कटौती की जा सकती है, बाजार के मूड में तेज़ बदलाव आया। ब्याज दरें कम होने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है, जिससे उनकी आय बढ़ने की उम्मीदें जगती हैं। इसके अलावा, कम अमेरिकी दरों से भारत जैसे विकासशील देशों में विदेशी पूंजी का प्रवाह (Foreign Capital Inflow) बढ़ जाता है, क्योंकि निवेशकों को यहाँ बेहतर रिटर्न की उम्मीद होती है। इस पूंजी प्रवाह की संभावना ने बाजार को मजबूती दी।
शुरुआती गिरावट के बाद, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी दोनों ही अचानक से हरे निशान (तेज़ी) में आ गए और दिन के कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स ने जहां 400 से अधिक अंकों की मजबूती दिखाई, वहीं निफ्टी भी 25,800 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद हुआ। इस अप्रत्याशित उछाल ने यह साबित कर दिया कि भारतीय शेयर बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों का सीधा और गहरा असर होता है, और निवेशक अपने फैसलों के लिए वैश्विक संकेतों पर बारीकी से नजर रखते हैं।



