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भारत-रूस संबंध: ट्रंप के दबाव और युद्ध के बीच पुतिन का दौरा, रक्षा सहयोग पर दिया जोर

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया भारत दौरे पर दुनिया भर की निगाहें टिकी रहीं, खासकर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच। इस दौरे का मुख्य आकर्षण दोनों देशों के बीच दशकों पुराने ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करना था, जो वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद अटूट बनी हुई है।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस और भारत मिलकर रक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे, जो मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित होगा। भारत को रूस से कच्चे तेल और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन दिया गया, जबकि दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को एक महत्वाकांक्षी स्तर तक बढ़ाने के लिए एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर भी सहमति व्यक्त की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-रूस की दोस्ती को ध्रुव तारे की तरह स्थिर बताया, जो दोनों देशों के गहरे पारस्परिक विश्वास को दर्शाता है। यह दौरा अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों के दबाव को दरकिनार करते हुए भारत की अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की नीति का स्पष्ट प्रमाण है। इसके अलावा, यूक्रेन संघर्ष पर भारत ने एक बार फिर शांति और बातचीत के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया, जिसे पुतिन ने भी सराहा। दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, जी-20, और एससीओ में घनिष्ठ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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