
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर हुए हमले और मिनाब के एक स्कूल पर हुई भीषण एयरस्ट्राइक की कड़े शब्दों में निंदा की है। आज, 5 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश ने इस घटना को “मानवता के खिलाफ अपराध” और अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने विशेष रूप से मिनाब के प्राथमिक स्कूल में 165 छात्राओं की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध के नाम पर मासूम बच्चों को निशाना बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता। अखिलेश ने इस हमले को वैश्विक शांति और जिनेवा कन्वेंशन के नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया है।सपा प्रमुख ने इस वैश्विक संकट के बहाने एक बार फिर डेटा और पारदर्शिता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि “सच्चे आंकड़े छिपाने की प्रवृत्ति” केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के समय में भी यह खतरनाक खेल खेला जाता है। अखिलेश के अनुसार, मिनाब स्कूल जैसे हमलों में नागरिक हताहतों की सही संख्या और सच्चाई दुनिया के सामने आनी चाहिए, ताकि जवाबदेही तय की जा सके। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि एक निष्पक्ष और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में भारत को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए। उनके अनुसार, हिंसा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती और यह केवल नफरत के नए चक्र को जन्म देती है।अखिलेश यादव ने अपनी स्पीच और संदेश में यह भी जोड़ा कि आज जब दुनिया आधुनिक तकनीक और विकास की बात कर रही है, तब स्कूलों और रिहायशी इलाकों पर बमबारी करना मध्यकालीन बर्बरता की याद दिलाता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की “चुप्पी” पर भी सवाल उठाए और पूछा कि “मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले देश अब खामोश क्यों हैं?” समाजवादी पार्टी ने घोषणा की है कि वह इस मानवीय संकट के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी और ‘विश्व शांति’ के समर्थकों के साथ खड़ी रहेगी। अखिलेश ने अंत में शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि मानवता की रक्षा के लिए पूरी दुनिया को एक स्वर में इन “कायरतापूर्ण हमलों” का विरोध करना होगा।



