
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के विकास दावों और हालिया रोजगार आंकड़ों पर निशाना साधते हुए इसे ‘जादुई सर्टिफिकेट’ की राजनीति करार दिया है। लखनऊ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश ने तंज कसा कि भाजपा सरकार के पास एक ऐसा ‘जादुई प्रिंटर’ है जो जमीन पर काम शून्य होने के बावजूद लाखों युवाओं को नौकरी के फर्जी सर्टिफिकेट बांट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इवेंट मैनेजमेंट के जरिए निवेश के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन हकीकत में शिक्षित युवा आज भी सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इन ‘जादुई सर्टिफिकेटों’ से किसी का पेट नहीं भरता और न ही इससे घरों में खुशहाली आती है, यह केवल चुनावी विज्ञापनों की सुर्खियां बटोरने का एक जरिया मात्र है। सपा प्रमुख का यह हमला विशेष रूप से उन सरकारी दावों पर था जिनमें उत्तर प्रदेश को ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए निवेश और रोजगार के भारी-भरकम आंकड़े पेश किए गए थे।
अखिलेश यादव ने इस तंज को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार का डेटा और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर अब जनता को साफ नजर आने लगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतने ही रोजगार सृजित हुए हैं, तो फिर पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर सरकार मौन क्यों है? अखिलेश के अनुसार, भाजपा केवल कागजों पर विकास की इमारतें खड़ी कर रही है और युवाओं को ‘स्किल इंडिया’ के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस ‘जादुई सर्टिफिकेट’ की श्रेणी में रखते हुए कहा कि अस्पतालों में बेड नहीं हैं और थानों में न्याय नहीं है, लेकिन सरकार को ‘नंबर वन’ होने का सर्टिफिकेट खुद ही बांटने का शौक है। सपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि आने वाले चुनावों में युवा अपने असली वोट की ताकत से सरकार के इन काल्पनिक आंकड़ों और फर्जी वादों का करारा जवाब देंगे।
भाजपा ने अखिलेश के इस ‘जादुई सर्टिफिकेट’ वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए इसे उनकी “बौद्धिक दिवालियापन” और विकास विरोधी मानसिकता का परिचय बताया है। सरकारी प्रवक्ताओं ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और रिकॉर्ड तोड़ निवेश पच नहीं रहा है, इसलिए वे संवैधानिक संस्थाओं और सरकारी डेटा पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और ई-गवर्नेंस के कारण आज युवाओं को सीधे उनके हाथों में नौकरी मिल रही है, जिसे अखिलेश ‘जादू’ कह रहे हैं क्योंकि उनके कार्यकाल में केवल ‘भाई-भतीजावाद’ का जादू चलता था। इस जुबानी जंग ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, जहाँ एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रमाण पत्र पेश कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें केवल कागज का टुकड़ा बताकर खारिज कर रहा है। यह बहस अब केवल आंकड़ों की नहीं रह गई है, बल्कि यह आगामी चुनावी रण में जनता के विश्वास को जीतने की एक बड़ी जंग बन चुकी है।



