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इस्रायल से ऐतिहासिक विदाई: मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती और सुरक्षा के नए आयाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इस्रायल यात्रा का समापन एक बेहद भावुक और कूटनीतिक रूप से सफल विदाई के साथ हुआ। तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रोटोकॉल तोड़कर न केवल पीएम मोदी को विदाई दी, बल्कि उन्हें गले लगाकर “एक भाई” की तरह विदा किया। नेतन्याहू ने पीएम मोदी को ‘इस्रायल का सच्चा और सबसे करीबी मित्र’ बताते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगी। विदाई के समय का यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है, जिसे भारत और इस्रायल के बीच गहरे होते ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के एक सशक्त प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। 26 फरवरी 2026 की यह शाम वैश्विक कूटनीति के पन्नों में एक स्थायी छाप छोड़ गई है।

इस यात्रा का सबसे बड़ा परिणाम भारत की सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक समझौतों के रूप में सामने आया है, जिनकी कीमत लगभग $10 बिलियन (करीब 83,000 करोड़ रुपये) आंकी जा रही है। दोनों देशों ने मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ‘आयरन डोम’ और ‘आयरन बीम’ जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के साझा विकास और खरीद पर सहमति जताई है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों के तहत अब भारत और इस्रायल मिलकर आधुनिक हथियारों का निर्माण करेंगे, जिससे भारत की रक्षा तैयारियों को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए इस्राइली रक्षा कंपनियां भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने पर भी सहमत हुई हैं।

विदाई से पहले पीएम मोदी ने इस्राइली राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग से भी मुलाकात की और इस्राइली संसद ‘नेसेट’ में दिए गए अपने संबोधन की सफलता के लिए आभार व्यक्त किया। यात्रा के दौरान भारत की डिजिटल पेमेंट प्रणाली ‘यूपीआई’ (UPI) को इस्रायल में लागू करने पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच पर्यटन और व्यापार को और आसान बनाएगी। पीएम मोदी ने इस्रायल की जनता को भारत आने का निमंत्रण दिया और यहूदी समुदाय के योगदान की सराहना की। जैसे ही प्रधानमंत्री का विमान भारतीय वायु सीमा की ओर मुड़ा, नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर “शालोम माई फ्रेंड” लिखकर भारत के साथ इस अटूट साझेदारी को जारी रखने का संकल्प दोहराया। इस यात्रा ने न केवल रक्षा बल्कि नवाचार और शांति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के साझा विजन को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है।

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