
संसद के बजट सत्र के दौरान ‘चीनी रोबोडॉग’ (Chinese Robodogs) का मुद्दा एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है, जहाँ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष की घेराबंदी का डटकर मुकाबला किया। विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें चीनी सेना द्वारा विकसित मशीन-गन से लैस रोबोटिक कुत्तों को वास्तविक युद्ध अभ्यासों में दिखाया गया था। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि भारत इन आधुनिक तकनीकों को अपनाने में पीछे छूट रहा है और सीमा पर इस नई चुनौती से निपटने के लिए हमारे पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि क्या भारतीय सेना इन हाई-टेक खतरों के लिए तैयार है और क्या हम अभी भी पारंपरिक युद्ध प्रणालियों पर ही निर्भर हैं।
विपक्ष के वार का जवाब देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा और तकनीकी विकास से कोई समझौता नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल इन उभरते खतरों से अवगत है, बल्कि ‘iDEX’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रोबोटिक और ऑटोनॉमस सिस्टम विकसित करने में तेजी से प्रगति कर रहा है। वैष्णव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) को उपेक्षित रखा था। उन्होंने खुलासा किया कि भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स पहले से ही निगरानी और लॉजिस्टिक्स के लिए ‘क्वाड्रुपेड रोबोट्स’ (चार पैरों वाले रोबोट) पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के अधिक अनुकूल हैं।
बहस के दौरान मंत्री ने डेटा सुरक्षा और चीनी हार्डवेयर के संभावित खतरों पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन द्वारा निर्मित रोबोडॉग न केवल एक शारीरिक खतरा हैं, बल्कि वे “जासूसी के उपकरण” (Trojan Horses) भी हो सकते हैं, जो संवेदनशील डेटा चुराने में सक्षम हैं। अश्विनी वैष्णव ने विपक्ष को याद दिलाया कि सरकार ने पहले ही चीनी ऐप्स और असुरक्षित टेलीकॉम उपकरणों पर प्रतिबंध लगाकर एक ‘सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम’ की नींव रखी है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी विदेशी तकनीक की अंधी नकल करने के बजाय “भरोसेमंद और सुरक्षित” (Trusted and Secure) स्वदेशी तकनीक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस तीखी बहस ने भविष्य के युद्ध कौशल और रक्षा में आत्मनिर्भरता के महत्व को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



