राजनीतिराष्ट्रीय

महाराष्ट्र विधानसभा: बिना ‘विरोधी पक्ष नेता’ के बजट सत्र

महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 2026 एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मोड़ पर है। राज्य के विधायी इतिहास में यह पहली बार है जब सदन की कार्यवाही बिना किसी आधिकारिक ‘नेता प्रतिपक्ष’ (LoP) के संचालित हो रही है।

संसदीय लोकतंत्र में एक अभूतपूर्व स्थिति

महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 23 फरवरी 2026 से शुरू हुआ, लेकिन विधानसभा और विधान परिषद दोनों ही सदनों में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली है। नियमों के मुताबिक, किसी भी दल को इस पद के लिए सदन की कुल संख्या का कम से कम 10% (विधानसभा में 29 विधायक) समर्थन होना अनिवार्य है। 2024 के चुनाव परिणामों के बाद, महा विकास अघाड़ी (MVA) के किसी भी अकेले दल के पास यह जादुई आंकड़ा नहीं है। शिवसेना (UBT) ने भास्कर जाधव का नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन तकनीकी आधार पर अभी तक इस पर मुहर नहीं लग पाई है।

विपक्ष का विरोध और ‘लोकतंत्र पर कलंक’

विपक्षी दलों ने इस स्थिति को ‘लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान’ करार दिया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इसे ‘लोकतंत्र पर कलंक’ बताया, वहीं विपक्षी नेताओं का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष के बिना बजट जैसे महत्वपूर्ण सत्र में सरकार की जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष जानबूझकर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष और परिषद के सभापति के अधिकार क्षेत्र में है और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करती।

दिवंगत अजीत पवार को श्रद्धांजलि और आगामी बजट

सत्र के पहले दिन का माहौल काफी भावुक रहा, क्योंकि सदन ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को श्रद्धांजलि दी, जिनका हाल ही में निधन हो गया था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने उन्हें “सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री जो महाराष्ट्र को कभी नहीं मिला” कहकर याद किया। इस बार का राज्य बजट 6 मार्च 2026 को पेश किया जाएगा। अजीत पवार की अनुपस्थिति में, वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री फडणवीस खुद राज्य का वित्तीय लेखा-जोखा पेश करेंगे, जिसमें बुनियादी ढांचे और ‘विकसित महाराष्ट्र’ के विजन पर जोर रहने की उम्मीद है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button