
राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा रैन बसेरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खरीदे गए कंबलों की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया है कि कंबलों की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जो कंबल वितरित किए गए हैं, वे न केवल घटिया दर्जे के हैं, बल्कि उनकी बाजार कीमत से कहीं अधिक दर पर खरीद दिखाई गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जयपुर सहित कई जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
‘गरीबों के हक’ पर सियासत और घेराबंदी
विपक्ष का तर्क है कि सरकार ने आपदा राहत कोष का दुरुपयोग करते हुए चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुँचाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भीषण शीत लहर के दौरान गरीबों को जो सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, उसे ‘कमीशनखोरी’ की भेंट चढ़ा दिया गया। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें वितरित किए गए कंबल पहली ही धुलाई में फटने या बहुत पतले होने का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस ने इस विवाद को ‘गरीब विरोधी मानसिकता’ का प्रतीक बताते हुए विधानसभा के आगामी सत्र में सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
भाजपा का पलटवार और स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की ‘हताशा’ बताया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सभी कंबलों की खरीद पारदर्शी तरीके से ई-टेंडरिंग के माध्यम से की गई है और गुणवत्ता मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस जनता का ध्यान अपनी आंतरिक गुटबाजी से भटकाने के लिए मनगढ़ंत आरोप लगा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कहीं भी वितरण में कोताही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल यह मुद्दा राजस्थान की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।



