
झारखंड में करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद आज, 23 फरवरी 2026 को 48 नगर निकायों के लिए मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रही है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह 7 बजे से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो अपने शहर की नई सरकार चुनने के लिए उत्साहित थे। दोपहर 1 बजे तक राज्य के कई हिस्सों में 35% से 50% तक मतदान दर्ज किया गया। रांची, धनबाद, जमशेदपुर और देवघर जैसे बड़े नगर निगमों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। आयोग ने पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इस बार मतदान बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए कराने का निर्णय लिया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और छिटपुट हंगामा
चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य भर में 4,304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 896 केंद्रों को ‘अति-संवेदनशील’ घोषित किया गया है। मतदान केंद्रों पर ‘टू-लेयर’ सुरक्षा व्यवस्था के साथ ड्रोन सर्विलांस का भी उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, धनबाद और जुगसलाई जैसे कुछ इलाकों में फर्जी वोटिंग और बोगस मतदान को लेकर छिटपुट हंगामे और समर्थकों के बीच झड़प की खबरें भी आईं, जिन्हें पुलिस ने समय रहते नियंत्रित कर लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया और जनता से लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसके बाद सभी बैलेट बॉक्स को सील कर स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रख दिया जाएगा।
गैर-दलीय आधार पर मुकाबला और भविष्य के संकेत
यद्यपि यह चुनाव आधिकारिक रूप से गैर-दलीय आधार (बिना दलीय सिंबल) पर लड़े जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में सत्ता पक्ष और विपक्ष समर्थित उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की सीधी जंग देखी जा रही है। 48 निकायों में मेयर, अध्यक्ष और 1,042 वार्ड पार्षदों के पदों के लिए कुल 6,124 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके राजनीतिक भविष्य का फैसला 43 लाख से अधिक मतदाता करेंगे। इन चुनावों के नतीजे आगामी 27 फरवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनाव के ये परिणाम राज्य की शहरी राजनीति की दिशा तय करेंगे और यह संकेत देंगे कि जनता वर्तमान सरकार के कामकाज और विपक्षी दावों को किस नजरिए से देख रही है।



