
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Indo-US Trade Deal) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस समझौते की आड़ में भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों का सौदा कर दिया है। रमेश ने कहा कि यह डील पूरी तरह से एकतरफा है और अमेरिका के बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने के लिए डिज़ाइन की गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस गुप्त समझौते के सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करे, ताकि देश जान सके कि किन शर्तों पर भारतीय बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोला जा रहा है। रमेश ने चेतावनी दी कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू हुआ, तो भारत की आर्थिक संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।
विशेष रूप से डेयरी और कृषि क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से करोड़ों पशुपालकों की आजीविका छिन जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका अपने डेयरी उद्योग को भारी सब्सिडी देता है, जिसके कारण भारतीय किसान उनके कम दामों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। रमेश ने इसे ‘अमूल’ और अन्य सहकारी समितियों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बताया। इसके साथ ही, उन्होंने ई-कॉमर्स और डेटा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार ने डेटा स्थानीयकरण (Data Localization) के नियमों को शिथिल कर दिया है, जिससे भारतीय नागरिकों की निजता और देश की डिजिटल सुरक्षा दांव पर लग गई है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा केवल एक चुनावी जुमला बनकर रह गया है, जबकि असलियत में सरकार देश को विदेशी आयात पर निर्भर बना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस “राष्ट्रविरोधी” समझौते का संसद से लेकर सड़क तक विरोध करेगी। रमेश ने सरकार को याद दिलाया कि यूपीए शासन के दौरान भारत ने हमेशा डब्ल्यूटीओ (WTO) और द्विपक्षीय वार्ताओं में अपने किसानों के हितों की रक्षा की थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने उन सभी सुरक्षा मानकों को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने मांग की कि इस व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने से पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों और किसान संगठनों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए।



