
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने असम दौरे के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और घुसपैठ की समस्या पर अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी जारी की। गुवाहाटी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और भारत की सीमाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में घुसपैठ में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे पूरी तरह से ‘शून्य’ पर लाना है। उन्होंने राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि वे आधुनिक तकनीक और ड्रोन सर्विलांस का उपयोग कर अवैध सीमा पार गतिविधियों को पूरी तरह ठप कर दें।
शाह ने घुसपैठियों के साथ-साथ उन राजनीतिक दलों को भी आड़े हाथों लिया जो “वोट बैंक की राजनीति” के कारण इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन रहते हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस और एआईयूडीएफ (AIUDF) पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने दशकों तक घुसपैठ को संरक्षण दिया ताकि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक सकें। गृह मंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि “अब असम में घुसपैठिया तो क्या, एक परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।” उन्होंने स्थानीय जनता को आश्वस्त किया कि भाजपा सरकार असम की सांस्कृतिक पहचान और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ‘क्लाज 6’ की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है।
अपने संबोधन के तीसरे हिस्से में अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि भारत-बांग्लादेश सीमा के नदी क्षेत्रों (Riverine borders) में ‘स्मार्ट फेंसिंग’ का कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है ताकि जलमार्गों से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। उन्होंने असम पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की और कहा कि ‘लैंड पोर्ट्स’ के माध्यम से वैध व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन अवैध रास्तों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। शाह ने विश्वास जताया कि घुसपैठ मुक्त असम ही एक “विकसित असम” की नींव बनेगा, जहाँ के संसाधनों पर केवल यहां के मूल निवासियों का अधिकार होगा।



