
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के केंद्र सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और वामपंथियों के बीच एक ‘गुप्त गठबंधन’ होने का बड़ा दावा किया है। ममता बनर्जी ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए कहा कि केरल के नाम परिवर्तन को मिली कैबिनेट की मंजूरी इस बात का प्रमाण है कि केरल में सत्तारूढ़ माकपा (CPI-M) और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच एक गहरा सियासी तालमेल विकसित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘अघोषित गठबंधन’ अब खुलकर सामने आ गया है, क्योंकि भाजपा ने केवल उन्हीं राज्यों की मांगों को तवज्जो दी है जहाँ उसे राजनीतिक लाभ दिख रहा है। ममता ने तंज कसते हुए कहा कि केरल के लोगों को उनकी पहचान मिलने पर उन्हें खुशी है, लेकिन जिस तरह से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, वह केंद्र की पक्षपाती राजनीति और वामपंथियों के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों को दर्शाता है।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को बंगाल के गौरव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर ‘बंगाल विरोधी’ होने का गंभीर आरोप लगाया और पूछा कि ‘पश्चिम बंगाल’ का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव पिछले कई वर्षों से क्यों लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा ने तीन बार सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन मोदी सरकार ने इसे हर बार ठंडे बस्ते में डाल दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को दबाना चाहती है क्योंकि राज्य की जनता भाजपा के सामने झुकने को तैयार नहीं है। ममता ने तर्क दिया कि ‘वेस्ट बंगाल’ नाम होने के कारण वर्णानुक्रम (Alphabetical order) में बंगाल का नंबर राष्ट्रीय बैठकों में सबसे अंत में आता है, जिससे राज्य के पक्ष को रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, फिर भी भाजपा सरकार इस प्रशासनिक और भाषाई मांग को अनदेखा कर रही है।
वहीं, ममता के इन आरोपों पर भाजपा और माकपा दोनों ने तीखा पलटवार करते हुए इसे उनकी हताशा बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि केरल का नाम बदलना एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था, जबकि बंगाल के प्रस्ताव में तकनीकी खामियां थीं जिन्हें ममता सरकार ने सुधारने के बजाय राजनीति का जरिया बना लिया है। दूसरी ओर, माकपा ने ममता बनर्जी के ‘भाजपा-वामपंथी गठबंधन’ वाले दावे को पूरी तरह से हास्यास्पद और बेबुनियाद करार दिया है। इस विवाद ने एक बार फिर केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भाजपा हमेशा सत्ता में नहीं रहेगी और एक दिन बंगाल को उसका वास्तविक नाम ‘बांग्ला’ जरूर मिलेगा।



