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राहुल गांधी का ‘डेटा स्ट्राइक’: “मोदी सरकार व्यापार के नाम पर बेच रही है भारतीयों की निजता!”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित ‘टेक्नोपार्क’ में 150 से अधिक आईटी पेशेवरों और स्टार्टअप संस्थापकों के साथ संवाद करते हुए ‘डेटा सुरक्षा’ (Data Privacy) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में फिनलैंड, सिंगापुर और जापान के साथ हुए व्यापार समझौतों में भारतीयों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि डेटा आज की दुनिया का “नया तेल” है, जिसे मोदी सरकार चंद विदेशी कंपनियों और अपने करीबी पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए खुले बाजार में नीलाम कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस डेटा संरक्षण कानून के अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर करना भारत की डिजिटल संप्रभुता के साथ खिलवाड़ है। राहुल के अनुसार, सरकार की विदेश नीति “पारदर्शिता की कमी” का शिकार है, जहाँ समझौतों की बारीकियाँ जनता से छिपाई जा रही हैं, जिससे भविष्य में भारतीयों की निजता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

आईटी विशेषज्ञों के साथ चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ‘गिग इकोनॉमी’ और एआई (AI) के दौर में श्रमिकों के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना तब तक अधूरा है जब तक कि हर नागरिक का डेटा सुरक्षित न हो और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचे। राहुल ने सवाल उठाया कि जब दुनिया के विकसित देश डेटा सुरक्षा के कड़े नियम बना रहे हैं, तब भारत सरकार विदेशी निवेश के लालच में “डेटा डंपिंग” (Data Dumping) की अनुमति क्यों दे रही है? उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से आह्वान किया कि वे केवल कोड न लिखें, बल्कि एक ऐसे ‘डिजिटल लोकतंत्र’ का निर्माण करें जहाँ तकनीक मानवीय मूल्यों के अधीन हो। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने व्यापार समझौतों में डेटा सुरक्षा की गारंटी नहीं दी, तो कांग्रेस पार्टी संसद से लेकर सड़क तक इस “डिजिटल लूट” के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।

संवाद के अंतिम चरण में राहुल गांधी ने केरल के ‘आईटी मिशन’ की सराहना करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बताया, जहाँ तकनीक का उपयोग जन-कल्याण के लिए किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल ‘मेक इन इंडिया’ के नारे लगाने से तकनीक नहीं आती, बल्कि इसके लिए स्वतंत्र अनुसंधान और डेटा की सुरक्षा अनिवार्य है। राहुल ने वादा किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वह एक ऐसा ‘न्यायपूर्ण डेटा कानून’ लाएगी जो नागरिकों को उनके डेटा का असली मालिक बनाएगा और बड़ी टेक कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसेगा। टेक्नोपार्क के इस मंच से उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि उनका भविष्य केवल कोडिंग स्किल पर नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल वातावरण पर निर्भर है। इस सत्र ने न केवल राहुल गांधी की तकनीकी समझ को उजागर किया, बल्कि मोदी सरकार की ‘प्रो-कॉर्पोरेट’ नीतियों के खिलाफ एक नया वैचारिक मोर्चा भी खोल दिया है।

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