मुख्य सचिवों का सम्मेलन: पीएम मोदी की अध्यक्षता में ‘विकसित भारत’ का रोडमैप तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में शुरू हुए ‘मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन’ की अध्यक्षता कर रहे हैं। दो दिनों (29-30 दिसंबर) तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, नीति आयोग के सदस्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) को मजबूती देना और जमीनी स्तर पर शासन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। प्रधानमंत्री इस मंच के माध्यम से ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर एक साझा विजन पर चर्चा कर रहे हैं।
सम्मेलन के एजेंडे में मुख्य रूप से सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), ई-गवर्नेंस, और आकांक्षी जिलों की प्रगति की समीक्षा शामिल है। इस वर्ष का विशेष ध्यान ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने पर है। प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के साथ मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को साझा करने के लिए एक ‘पीयर लर्निंग’ (Peer Learning) मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में राज्यों की भूमिका पर भी गहन मंथन किया जा रहा है ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना सामूहिक रूप से किया जा सके।
यह 5वां सम्मेलन प्रशासन के विकेंद्रीकरण और कार्यक्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। दो दिनों के इस मंथन के बाद, एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी जिसे आगामी केंद्रीय बजट और राज्य स्तर की नीतियों में शामिल किया जा सकता है। पीएम मोदी द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर राज्य अपनी वार्षिक विकास योजनाओं को अंतिम रूप देंगे। इस सम्मेलन का निष्कर्ष न केवल सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास का लाभ देश के हर कोने तक समान रूप से पहुँचे। केंद्र-राज्य समन्वय का यह मॉडल वैश्विक स्तर पर शासन के एक सफल और पारदर्शी उदाहरण के रूप में उभर रहा है।



