
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज एक ऐतिहासिक और साहसिक घोषणा करते हुए देश को आश्वस्त किया है कि 31 मार्च 2026 तक भारत की धरती से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण वामपंथी उग्रवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और इस महीने के अंत तक ‘लाल गलियारा’ इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा। शाह ने कटक और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के दौरों के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि नक्सलियों का नेतृत्व बिखर चुका है और उनके सुरक्षित ठिकाने अब सुरक्षा बलों के पूर्ण नियंत्रण में हैं। गृह मंत्री का यह बयान केवल एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन प्रहार’ की सफलता का एक ठोस प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा और आतंक के बल पर विकास को रोकने की कोशिश करने वालों के लिए अब लोकतंत्र में कोई जगह नहीं बची है।
अमित शाह ने इस ‘मिशन मोड’ अभियान के तहत सुरक्षा और विकास के समन्वय पर विशेष प्रकाश डाला, जहाँ एक ओर हथियारों का खात्मा हो रहा है, तो दूसरी ओर दूरदराज के कबीलाई इलाकों में बिजली, पानी और इंटरनेट पहुँच रहा है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में ‘अभेद्य सुरक्षा घेरा’ तैयार किया है, जिससे नक्सलियों की रसद और संवाद के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। शाह के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और अब सरकार का लक्ष्य इस आंकड़े को शून्य पर लाना है। गृह मंत्री ने उन युवाओं से भी मुख्यधारा में लौटने की अंतिम अपील की है जो गुमराह होकर हथियारों की राह पर चल पड़े थे, और उन्हें सरकारी पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाने का सुझाव दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अब भी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उन्हें कानून की पूरी ताकत का सामना करना होगा क्योंकि देश की अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
31 मार्च की इस समयसीमा को लेकर सुरक्षा महकमों में भारी हलचल है और इसे ‘नक्सल मुक्त भारत’ के संकल्प की सिद्धि के रूप में देखा जा रहा है। अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाला नया वित्तीय वर्ष भारत के लिए एक ऐसी सुबह लेकर आएगा जहाँ बस्तर से लेकर गढ़चिरौली तक का कोई भी नागरिक डर के साये में नहीं जिएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उन वीर जवानों के बलिदान को दिया, जिन्होंने घने जंगलों में रहकर उग्रवाद के खिलाफ मोर्चा संभाला है। इस बड़े ऐलान के बाद नक्सल प्रभावित राज्यों में जश्न और उम्मीद का माहौल है, क्योंकि दशकों पुराने इस दंश के खत्म होने से आर्थिक और सामाजिक प्रगति के नए द्वार खुलेंगे। गृह मंत्री की इस ‘दहाड़’ ने यह साफ कर दिया है कि 2026 का मार्च महीना भारतीय आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है।



