
बिहार की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 की देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी किसी नए विवाद में नहीं, बल्कि साल 1995 के एक पुराने आपराधिक मामले में हुई है, जिसमें उन पर धोखाधड़ी और जालसाजी (IPC की धारा 467) के आरोप हैं। मामला पटना के गर्दनीबाग थाने से जुड़ा है, जहाँ उन पर धोखाधड़ी से एक मकान किराए पर लेकर उसे कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने और बाद में उस पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की।
गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव के पटना स्थित मंदिरी आवास पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भारी संख्या में पुलिस बल और कई थानों की पुलिस जब उनके घर पहुँची, तो सांसद और उनके समर्थकों ने इसका कड़ा विरोध किया। पप्पू यादव का तर्क था कि वे आधी रात को पुलिस के साथ नहीं जाएंगे और उन्होंने इसे कानून के खिलाफ बताया। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और पुलिस बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें ‘अपराधियों’ की तरह उठाने आई है। काफी घंटों की बहस और गहमागहमी के बाद, पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गर्दनीबाग थाने ले गई। इस दौरान सांसद ने अपनी जान को खतरा भी बताया और कहा कि वे खुद सुबह कोर्ट में सरेंडर करने वाले थे।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने की खबर आई, जिसके बाद उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। राजनीति के गलियारों में इस गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहाँ पुलिस इसे एक अदालती आदेश का पालन बता रही है, वहीं विपक्ष और पप्पू यादव के समर्थकों ने इसे ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से पप्पू यादव बिहार में आपराधिक घटनाओं और एक छात्रा की मौत के मामले को लेकर सरकार और गृह विभाग पर काफी हमलावर थे। फिलहाल, उन्हें विशेष सांसद-विधायक (MP-MLA) कोर्ट में पेश किया जा रहा है, जहाँ उनके वकील जमानत के लिए दलीलें पेश करेंगे।



