
बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने आज, 3 फरवरी 2026 को बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का ‘पूर्ण बजट’ पेश किया। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश सरकार की इस नई पारी का यह पहला विस्तृत बजट है, जिसका आकार लगभग ₹3.50 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। सरकार ने इस बजट में ‘आत्मनिर्भर बिहार’ के संकल्प को दोहराते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य की विकास दर को दहाई अंकों में बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इस दौरान विपक्षी दलों ने सदन में हंगामा भी किया, लेकिन सरकार ने अपने रोडमैप के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार अब विकसित राज्य बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।
बजट की सबसे बड़ी घोषणा युवाओं के लिए ‘एक करोड़ नौकरी और रोजगार’ के वादे को पूरा करने की दिशा में नए पदों के सृजन को लेकर रही। सरकार ने विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों को भरने और स्वरोजगार के लिए ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाने का प्रावधान किया है। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहल की गई है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को अधिक अनुदान देने की बात कही गई है। इसके अलावा, कृषि के क्षेत्र में ‘चतुर्थ कृषि रोडमैप’ को मजबूती देने के लिए सिंचाई परियोजनाओं और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (Food Processing Units) के लिए विशेष फंड आवंटित किया गया है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने बिहार में प्रस्तावित 9 नए एक्सप्रेस-वे और बेहतर ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी के लिए बड़े बजटीय आवंटन की घोषणा की है। शिक्षा के क्षेत्र में बजट का सबसे बड़ा हिस्सा खर्च किया जाएगा, जिसमें नए मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना के साथ-साथ डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए जिला अस्पतालों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और टेली-मेडिसिन सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर, यह बजट न केवल राज्य के आर्थिक संतुलन को बनाए रखने का प्रयास है, बल्कि आगामी वर्षों के लिए बिहार के सर्वांगीण विकास की एक ठोस आधारशिला भी है।



