
भारतीय वायदा बाजार (MCX) में आज, 29 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में “रॉकेट” जैसी तेजी देखी गई। चांदी की कीमतों ने आज एक ऐतिहासिक मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए पहली बार ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम का आंकड़ा छू लिया। सुबह के सत्र में चांदी ₹18,000 से अधिक की छलांग लगाकर ₹4,07,456 प्रति किलो के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई। वहीं, सोने ने भी नया कीर्तिमान स्थापित किया और 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,80,500 प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) में भी सोना $5,600 प्रति औंस और चांदी $119 प्रति औंस के पार कारोबार कर रही है, जो वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच बढ़ते डर और सुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण भू-राजनीतिक तनाव है, विशेषकर अमेरिका द्वारा मध्य-पूर्व (ईरान) में सैन्य बेड़ा भेजने की खबरों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की ओर धकेला है। चांदी के मामले में, यह केवल निवेश नहीं बल्कि ‘इंडस्ट्रियल रश’ का परिणाम है। एआई (AI) डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सोलर पैनल उद्योग में चांदी की भारी कमी (Supply Deficit) देखी जा रही है। साथ ही, चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने वैश्विक स्तर पर इसकी किल्लत और बढ़ा दी है। अमेरिकी डॉलर के चार साल के निचले स्तर पर पहुँचने से भी इन धातुओं की कीमतों को जबरदस्त सहारा मिला है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अल्पकालिक उछाल नहीं, बल्कि कीमती धातुओं की कीमतों का एक “स्ट्रक्चरल री-रेटिंग” है। जहाँ चांदी ने मात्र 10 दिनों में ₹1 लाख प्रति किलो की बढ़त दर्ज की है, वहीं सोने ने इस साल अब तक 18% से अधिक का रिटर्न दिया है। हालांकि, इस भारी तेजी से आम जनता और आभूषण निर्माताओं के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि शादी-ब्याह के सीजन में गहने खरीदना अब आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है, इसलिए छोटे निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। फिलहाल, बुलियन मार्केट के लिए यह साल ‘स्वर्ण युग’ साबित हो रहा है।



