
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार आज, 29 जनवरी 2026 को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। सुबह 9 बजे उनके आवास ‘काटेवाड़ी’ से शुरू हुई अंतिम यात्रा में “अजित दादा अमर रहे” के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। उनके दोनों बेटों, पार्थ और जय पवार ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार सहित देश के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। पुलिस की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर और बिगुल बजाकर अपने नेता को अंतिम सलामी दी। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, जिसके तहत आज राज्य के सभी सरकारी कार्यालय और शिक्षण संस्थान बंद रहे।
अजित पवार के अंतिम दर्शन के लिए बारामती में सुबह से ही लाखों समर्थकों की भीड़ जुटी थी, जिससे प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और पवार परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। शरद पवार, जो अपने भतीजे के निधन से बेहद भावुक नजर आए, पूरे समय परिवार के साथ खड़े रहे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित विपक्षी नेताओं ने भी इस दुख की घड़ी में एकजुटता दिखाई। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपना एक “सच्चा मार्गदर्शक” और “काम करने वाला नेता” खो दिया है, जिसने बारामती की तस्वीर बदल दी थी।
हादसे की जांच के लिए DGCA और ‘विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो’ (AAIB) की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। शुरुआती जांच में लैंडिंग के दौरान “लॉस ऑफ स्टेबिलिटी” और तकनीकी खराबी को दुर्घटना का कारण माना जा रहा है। अजित पवार के साथ जान गंवाने वाले दोनों पायलटों और स्टाफ सदस्यों के शव भी उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का कद इतना बड़ा था कि उनके जाने से महायुति और राज्य की सियासत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। आज बारामती का हर घर शोक में डूबा है, क्योंकि उन्होंने केवल एक नेता नहीं, बल्कि अपने ‘दादा’ को खोया है। उनकी अंतिम विदाई ने साबित कर दिया कि वे वास्तव में एक जननायक थे।



