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ट्रम्प का ईरान को अल्टीमेटम: प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन और व्यापारिक देशों पर 25% टैरिफ की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में जारी जन-विद्रोह पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रदर्शनकारियों के प्रति अटूट समर्थन व्यक्त किया है। व्हाइट हाउस से जारी एक कड़े संदेश में ट्रम्प ने कहा कि वे ईरान के साहसी लोगों को “आज़ाद” देखना चाहते हैं और उनका प्रशासन ईरानी शासन के अत्याचारों को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगा। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान का वर्तमान नेतृत्व अपने ही नागरिकों का दमन कर रहा है, और अब समय आ गया है कि एक नया लोकतांत्रिक शासन स्थापित हो। इस बयान ने न केवल ईरान के भीतर प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि तेहरान के धार्मिक नेतृत्व के साथ वाशिंगटन के तनाव को अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँचा दिया है।

राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ ट्रम्प ने एक बार फिर अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ आर्थिक नीति का उपयोग करते हुए उन देशों को आगाह किया है जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि जो भी देश ईरान के साथ तेल या अन्य वस्तुओं का व्यापार करेगा, उसके अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ (सीमा शुल्क) लगाया जाएगा। यह नीति विशेष रूप से चीन, भारत और कुछ यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो ईरान से ऊर्जा संसाधनों का आयात करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “आर्थिक घेराबंदी” ईरान के राजस्व के स्रोतों को पूरी तरह सुखा देने और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

ट्रम्प की इस ‘टैरिफ नीति’ का वैश्विक बाजारों पर तत्काल प्रभाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई है, क्योंकि व्यापारियों को डर है कि प्रतिबंधों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है। दूसरी ओर, कूटनीतिज्ञों ने चेतावनी दी है कि एकतरफा टैरिफ लगाने से अमेरिका के अपने सहयोगियों के साथ संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वे व्यापारिक हितों के ऊपर मानवाधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा को तरजीह देंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वैश्विक शक्तियां अमेरिकी दबाव में झुकती हैं या ईरान संकट के समाधान के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग तलाशती हैं।

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