ट्रम्प की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स और ईरान के खिलाफ सख्त चेतावनी

डोनाल्ड ट्रम्प ने मेक्सिको को स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी तुरंत नहीं रुकी, तो अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रम्प ने मेक्सिकन ड्रग कार्टेल्स को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ घोषित करने की योजना बनाई है, जिससे अमेरिकी विशेष बलों को मेक्सिको की धरती पर जाकर इन नेटवर्कों को तबाह करने का कानूनी आधार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि “अब मेक्सिको को अपनी सीमाओं पर नियंत्रण करना होगा, अन्यथा हम उनके लिए यह काम करेंगे।” इस बयान से दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया है, क्योंकि मेक्सिको ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
ईरान के संदर्भ में, ट्रम्प ने अपने पिछले कार्यकाल की ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति को फिर से लागू करने का संकेत दिया है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों की दिशा में कोई भी कदम उनके लिए घातक साबित होगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामक क्षेत्रीय गतिविधियों और आतंकी समूहों को वित्तपोषण देना बंद नहीं किया, तो उन पर अब तक के सबसे कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाने और उनके बैंकिंग तंत्र को पूरी तरह से वैश्विक बाजार से अलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ना तय है।
ट्रम्प के इन बयानों ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। समर्थकों का मानना है कि यह “शांति के माध्यम से शक्ति” (Peace through Strength) की नीति है, जो अमेरिका के दुश्मनों को पीछे हटने पर मजबूर करेगी। वहीं, आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की एकतरफा धमकियाँ वैश्विक अस्थिरता और युद्ध की स्थिति पैदा कर सकती हैं। इन चेतावनियों का असर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल की कीमतों पर दिखना शुरू हो गया है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ट्रम्प की ये धमकियाँ केवल कूटनीतिक दबाव बनाने का जरिया हैं या अमेरिका वास्तव में सैन्य कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाएगा।



